दुनिया के नए आविष्कार
विज्ञान के बारे में आप सभी
परिचित होंगे | विज्ञान में रोज कोई न कोई नए आविष्कार होते रहते है| आज में यहाँ
विज्ञान की कुछ नयी खोज के बारे में बताने जा रहा हूँ |
1. जामुन से बनेगा सोलर सेल
अब जामुन से सोलर सेन (Solar Cell ) बन सकेगा | सुनने
में अजीब लगता है कि जामुन जेसे फल से सोलर सेल केसे बन सकता है, मगर यह सही है | जामुन
से सोलर सेल बनाने में कामयाबी हासिल की है भारत के आई.आई.टी रूडकी के वैज्ञानिकों
ने | शोधकर्ताओं ने जामुन के प्राकृतिक पिगमेंट की सहायता से सेंसिटाइजड सोलर
सेल्स के लिए किफायती और प्रभावी फोटोसेंसिटाइजर बनाने में सफलता हासिल की है | इस
शोध के अगुवा आई. आई. टी. रूडकी के सहायक प्रोफेसर के मुताबिक संस्थान के परिसर
में बहुत सारे पेड़ है | उन पेड़ो के जामुनो के गहरे रंग को देखते हुए इससे डाई
सेंसिटाइजड सोलर सेल बनाने का विचार आया था | फिर शोधकर्ताओं ने एथनाल की सहायता
से जामुन से डाई निकला | इसमें आलूबुखारा और काले अंगूर का उपयोग किया गया था |
अक्षय उर्जा के नए स्रोत तलाशने की दशा में भारतीय वैज्ञानिको की यह एक बहुत
महत्वपूर्ण सफलता है |
2. कैप्सूल के आकार का पेसमेकर कण्ट्रोल करेगा धडकन
पेसमेकर के बारे में आप सभी
जानते होंगे कि यह दिल की धडकन को कण्ट्रोल करने के काम आता है | पेसमेकर की चोडाई
माचिस की डिब्बी के बराबर होती है मगर यह बहुत पतला होता है | अब वैज्ञानिकों ने
दिल की धडकनो को कण्ट्रोल करने के लिए दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर बनाया है |
फ़िलहाल जो पेसमेकर लगाये जाते है उससे दस गुनाह छोटा है यह नया पेसमेकर | दिल की
धडकनों को समान्य बनाये रखने के लिए बनाई गई माइक्रो ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम (TPS) नाम वाली इस डिवाइस को अमेरिका से मजूरी मिल चुकी है और
एक मरीज को सफलतापूर्वक लगाया भी जा चूका है | इस पेसमेकर को बनाने वालो के अनुसार
यह दिल की पेसमेकर सबसे छोटी पेसमेकर है | इसका साइज़ सिर्फ एक कैप्सूल के बराबर है
| जिस मरीज को यह पेसमेकर लगाया गया है वह पेसमेकर अच्छी तरह से काम कर रहा है |
3. बिना स्याही छपाई हो सकेगी कागज पर
क्या आपने कभी सोचा होगा की
बिना स्याही कागज पर छपाई हो सकेगी, सायद नहीं सोचा होगा क्योकि यह असम्भव सा लगता
है मगर यह असम्भव कम आज सम्भव है | दरसल शोधकर्ताओ ने एक ऐसा नया कागज़ बनाया है
जिस पर 80 बार तक बिना रिसाईकल
किये छपाई की जा सकती है| इस कागज पर स्याही के जगह अल्ट्रावायलट किरणों का
इस्तमाल किया जाता है | यह कागज चीन और अमेरिका के शोधकर्ताओ ने बनाया है | इस
कागज पर अल्ट्रावायलट रौशनी की मदद से अक्षरों को कागज पर छोड़ा जाता है और वो नीले
रंग में छपते है, मगर यह छपाई पांच दिनों में अपनेआप ही मिट जाती है | इस कागज की
छपाई को बहुत ज्यादा गर्म करके दस मिनट में भी मिटाया जा सकता है | इस कागज की
छपाई को मिटाने के बाद, इसपर फिर से छपाई की जा सकती है | ऐसा 80 बार तक किया जा सकता है | आज
दुनिया में जहाँ कागज बनाने के लिए भारी मात्रा में पेड़ काटे जा रहे है | ऐसे में
इस कागज के बनने से कागज की बड़ी बर्बादी रखेगी और पेड़ काटने से पर्यावरण को जो
नुकशान हो रहा है उससे भी बचा जा सकता है |
4. साँस से हो सकेगी रोगों की पहचान
आज
हमें रोगों की जाँच कराने के लिए तरह तरह के टेस्ट कराने पड़ते है | मगर अब इन सब
टेस्टों से छुटकारा मिल सकता है | इजराइल के वैज्ञानिको ने एक ऐसा उपकरण बनाया है
जिसमे सिर्फ साँस छोडकर शरीर के 17 रोगों
की जाँच हो सकती है | जिनमे कई प्रकार घातक रोग जेसे कैंसर और पर्किसन रोग शामिल
हैं | इस जाँच का खर्च भी बहुत कम हुआ करेगा | इस जाँच से रोगों की जानकारी पहले
से मिलने से रोगों का इलाज आसानी से किया जा सकेगा | वैज्ञानिको ने अपने प्रयोगों
में बहुत मरीजो पर परिक्षण करके उनके शरीर के 17 रोगों का पता लगाया था | ये परिक्षण इजराइल के
प्रोफेसर होसम हाईक ने किया था | इस नई रोग परिक्षण तकनीक को आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंट नेनोयेरे नाम रखा गया है | इस तकनीक से शरीर के रोगों की जाँच का खर्चा
भी बहुत कम हो जायेगा और मरीजो को बहुत सुविधा हो जाएगी |
5. नकली आंख से देख सकेंगे द्रष्टिहीन
द्रष्टिहीन
भी अब नकली आंख से देख सकेंगे | रेटिना की खराबी की वजह से जिनकी आंखे खराब हो
जाती है, देख नहीं पाते है| उनके लिए वैज्ञानिको नकली आंख बना रहे है | जिसकी मदद
से वे लोग देख सकेंगे | चश्मे की तरह दिखने वाले इस उपकरण को वेज्ञानिको ने नाम
दिया है आर्गस-2 | इसमें एक केमरा लगा है जिससे कंप्यूटर
प्रोसेसर जुड़ा है | रेटिना की सतह पर एलेक्ट्रोड़ होता है जो आंखो के पीछे से एक
एंटीना से जुड़ा होता है | केमरा आसपास की विडियो बनाकर कंप्यूटर प्रोसेसर को भेज
देता है | प्रोसेसर विडियो को विधुत तरंगो में बदल देता है | ये तरंगे आँखों के
पीछे रेटिना में लगाए गए एंटीना को भेज देता है | ये तरंगे एक केबल के जरिये भेजी
जाती है जो रेटिना की सतह पर लगे एलेक्ट्रोड़ से जुडी होती है | एलेक्ट्रोड़ रेटिना
की कोशिकाओ को भेजती है, जिससे व्यक्ति के मस्तिष्क में चित्र उभरता है | इस उपकरण
से नेत्रहीनो को देखने में बहुत सहायता मिलेगी |
6. दिल बनाया गया प्रयोगशाला में
आज
दिल की बीमारी से बहुत लोग परेशान है | दिल जब सही से काम नहीं करता है तो दिल
प्रत्यारोपण (Heart Transplant )
करा जाता है | मगर प्रत्यारोपण के लिए
दिल की कमी से पूरी दुनिया जूझ रही है | इस समस्या के समाधान के लिए विज्ञानिको ने
एक बड़ी खोज की है | स्वीडिश दवा निर्माता एस्ट्रा जेनेका के शोधकर्ताओ ने चूहे और
मानव कोशिकाओ से दुनिया का पहला धडकता हुआ छोटा सा दिल बनाया है | इससे भविष्य में
दिल के रोगों के इलाज में मदद मिलेगी | साथ ही प्रयोगशाला में दिल तेयार किया जा
सकेगा | दिल बनाने के लिए सबसे पहले चूहे के शरीर से दिल निकाला गया | फिर एक
तकनीक से इसे छोटे आकार में बदला गया | इस तकनीक से चूहे की धमनियां और नसों में
एक घोल डाला जाता है | घोल चूहे के दिल की कोशिकाओ को पृथक कर देता है | इस
प्रक्रिया में दिल का ढ़ाचा और वाल्व सही रहते है | इस ढांचे को मानव कोशिकाओ के
साथ विकसित किया जाता है | इससे धडकने वाला छोटा सा दिल बनकर तेयार हो जाता है | यह
एक बहुत बड़ी खोज है जो प्रत्यारोपण के लिए दिल की कमी को खत्म कर देगी |
मुझे
उम्मीद है कि हमारी दुनिया की नयी नयी खोजो के बारे में जानकर आपको अच्छा लगा होगा
| मेरी यह पोस्ट आपको केसी लगी इसके बारे में मुझे comment में जरुर बताएं और please इसे share भी कर दे जिससे अधिक से अधिक लोग इन
नयी खोजो के बारे में जान सके, धन्यवाद |
Naye invention ke bare me jaanker accha laga
ReplyDeletemeri aur bhi post bade aur bhi jhnakari milegi
ReplyDelete